MP News: बालाघाट में 10 नक्सलियों का ऐतिहासिक सरेंडर, CM मोहन यादव के सामने डाले हथियार; 2.36 करोड़ था ईनाम

बालाघाट: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के लिए आज का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। पिछले साढ़े तीन दशकों से नक्सलवाद का दंश झेल रहे इस..

बालाघाट: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के लिए आज का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। पिछले साढ़े तीन दशकों से नक्सलवाद का दंश झेल रहे इस क्षेत्र में आज एक बड़ी सफलता मिली, जब 2 करोड़ 36 लाख रुपये के ईनामी 10 खूंखार नक्सलियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने आत्मसमर्पण (Surrender) कर दिया।

​नक्सलियों ने राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। सरेंडर करने वालों में 6 पुरुष और 4 महिला नक्सली शामिल हैं।

​हथियारों के साथ किया सरेंडर

​पुलिस और प्रशासन के लिए यह एक बड़ी जीत मानी जा रही है। नक्सलियों ने सिर्फ सरेंडर ही नहीं किया, बल्कि अपने आधुनिक हथियार भी सीएम के चरणों में डाल दिए। सरेंडर किए गए हथियारों में शामिल हैं:

  • ​02 एके-47 (AK-47) राइफल
  • ​02 इंसास (INSAS) राइफल
  • ​01 एसएलआर (SLR)
  • ​02 सिंगल शॉट गन

​कौन हैं सरेंडर करने वाले बड़े नक्सली?

​जिन नक्सलियों ने हथियार डाले हैं, वे नक्सली संगठन के अहम पदों पर थे। इनमें एमएमसी जोन (MMC Zone) का सचिव कबीर उर्फ सुरेंद्र सबसे प्रमुख चेहरा है। इसके अलावा के.बी. डिवीजन के कई सक्रिय सदस्य शामिल हैं:

  • ​राजेश
  • ​समर
  • ​लालसु
  • ​शीला
  • ​नवीन
  • ​जरेना
  • ​शिल्पा
  • ​सुनीता
  • ​कबीर का गनमैन

​नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन का असर: CM मोहन यादव

​इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट पुलिस और सुरक्षा बलों को इस बड़ी सफलता के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए तय की गई डेडलाइन और राज्य सरकार की ठोस नीतियों का परिणाम है।

​सीएम ने कहा, “राज्य सरकार ने आत्मसमर्पित नक्सलियों की सुरक्षा और पुनर्वास की पूरी जिम्मेदारी ली है। जो नक्सली अभी भी जंगलों में हैं, वे भी समय रहते सरेंडर कर दें और मुख्यधारा में लौट आएं, अन्यथा उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।”

​क्यों खास है यह सरेंडर?

​बालाघाट, जो मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के ट्राइजंक्शन पर स्थित है, लंबे समय से नक्सली गतिविधियों का केंद्र रहा है। इतनी बड़ी संख्या में, खास तौर पर जोनल सेक्रेटरी स्तर के नक्सली का हथियारों के साथ सरेंडर करना, नक्सली संगठन की कमर तोड़ने जैसा है।

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