रायसेन: विवाह से पहले गऊ माता का ‘छप्पन भोग’, 51 गायों के सामूहिक भोज के बाद शुरू हुईं शादी की रस्ने; बिना दहेज की शादी बनी नज़ीर

बेगमगिरी/रायसेन। भारतीय समाज में शादियां अक्सर भारी-भरकम खर्च और आडंबर का मंच बन जाती हैं। इसी बीच, रायसर जिले के बेगमगंज कस्बे से एक ऐसी..

विवाह से पहले गऊ माता का 'छप्पन भोग',

बेगमगिरी/रायसेन। भारतीय समाज में शादियां अक्सर भारी-भरकम खर्च और आडंबर का मंच बन जाती हैं। इसी बीच, रायसर जिले के बेगमगंज कस्बे से एक ऐसी अनूठी शादी सामने आई है जिसने पूरी दुनिया के सामने इंसानियत और गौभक्ति की एक बड़ी मिठास पेश की है। यहाँ एक दूल्हे ने अपनी बारात निकालने से पहले 51 गौ माता का भव्य स्वागत किया और उन्हें छप्पन प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों का भोग लगाया। और सबसे बड़ी बात यह विवाह पूरी तरह से दहेज-मुक्त रहा।

मंडप से पहले गौशाला में बांटी खुशियाँ 24 वर्षीय युवा दूल्हे आयुष यादव की शादी की शुरुआत किसी लग्जरी रिसॉर्ट की जगह गौ माता की सेवा से हुई। आयुष यादव एक समर्पित गऊ भक्त हैं और वे पिछले कई सालों से लगातार गायों की सेवा करते आ रहे हैं। उनका मानना था कि जब उनकी जिंदगी में नई राह खुल रही है, तो उसकी शुरुआत गऊ माता के आशीर्वाद से होनी चाहिए। इसी संकल्प के तहत विवाह की रस्में शुरू होने से पहले ही गायों के लिए एक विशाल और विशेष भोज का आयोजन किया गया।

विवाह से पहले गऊ माता का 'छप्पन भोग',

ढाई क्विंटल गेहूं-मक्का पिसवाया, 56 व्यंजनों का भोग गौ माता की सेवा के लिए विशेष तैयारियाँ की गई थीं। समारोह स्थल पर आए मेहमानों की तरह ही गायों के लिए भी वीपीआई (VIP) इंतजाम किए गए। कुल 51 गायों को भोजन कराने के लिए ढाई क्विंटल से अधिक गेहूं और मक्का खास तौर पर पिसवाया गया था। इसके साथ ही ताजा हरा चारा भी मंगवाया गया था। गौ माताओं को पूरे सम्मान और आदर के साथ 56 प्रकार के व्यंजनों का छप्पन भोग लगाया गया। दूल्हे आयुष ने स्वयं पूरे विधि-विधान से गऊ माता की पूजा-अर्चना की और अपने हाथों से उन्हें गोग्रास खिलाया, और इसी के बाद उन्होंने विवाह संस्कार की शुरुआत की।

विवाह से पहले गऊ माता का 'छप्पन भोग',

समाज के लिए एक सशक्त संदेश: पिता अनिल यादव इस अनूठी पहल के पीछे आयुष यादव के साथ-साथ उनके पूरे परिवार की मजबूत सोच रही है। आयुष के पिता, अनिल यादव, जो यादव महासभा रायसेन के जिलाध्यक्ष भी हैं, समाज को एक स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं। उनका कहना है कि शादियों में फिजूल खर्च और दहेज प्रथा को खत्म किया जाना चाहिए। वे शुरू से ही भगवान कृष्ण और राधारानी के अनन्य भक्त रहे हैं और उनका मानना है कि गऊ सेवा ही दुनिया की सबसे बड़ी सेवा है।

विवाह से पहले गऊ माता का 'छप्पन भोग',

बेगमगंज में हर ओर तारीफ शादी में शामिल होने आए मेहमान और स्थानीय लोग इस पहल की जमकर सराहना कर रहे हैं। समारोह में शामिल हुए विशाल शिल्पकार ने कहा, “आयुष यादव और उनके परिवार की यह एक शानदार पहल है। इस दुनिया में सबसे बड़ी सेवा गौ सेवा ही है और आज पूरे बेगमगंज में हर तरफ आयुष की इस सोच की ही तारीफ हो रही है।”

आज के दौर में जहां कई शादियां सिर्फ दिखावे के इर्द-गिर्द घूमती हैं, आयुष यादव का यह विवाह युवाओं और पूरे समाज के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल है। यह साबित करता है कि सच्चे मूल्यों और आस्था के साथ भी जीवन के सबसे महत्वपूर्ण दिनों को और भी ज्यादा यादगार बनाया जा सकता है।

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