पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने बंपर जीत के साथ सत्ता में दमदार दस्तक दे दी है। 208 सीटों पर विजय की कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। चुनाव से पहले पूरा मामला 50-50 का माना जा रहा था, ऐसा लग रहा था कि कांटे की टक्कर होगी, लेकिन मुकाबला इतना एकतरफा हो जाएगा, यह किसी ने नहीं सोचा था। खैर, बीजेपी अब बंगाल में अपना कमल पूरी तरह खिला चुकी है।
अब जबकि नई सरकार सत्ता संभालने जा रही है, तो मेरे ख्याल से उन्हें सबसे पहले एक बेहद जरूरी और व्यावहारिक काम करना चाहिए। वो काम है—राज्य के नाम को दुरुस्त करना। ज़रा सोचिए, जब पूर्व में कोई बंगाल है ही नहीं (जो था वो तो बरसों पहले एक अलग देश बन गया), तो फिर भारत में जो इकलौता बंगाल है, उसे आज भी ‘पश्चिम बंगाल’ या ‘वेस्ट बंगाल’ क्यों बोला जाए? इसे सीधे और साफ तौर पर सिर्फ ‘बंगाल’ कहा जाना चाहिए।

प्रक्रिया भी बहुत सीधी है। नई सरकार को अपनी विधानसभा में नाम परिवर्तन के लिए एक प्रस्ताव पारित करना चाहिए और केंद्र सरकार उस पर अपनी मुहर लगाकर उसे संसद में पेश कर दे। मुझे नहीं लगता कि इस काम के लिए या राज्य का नाम सिर्फ ‘बंगाल’ रखने पर किसी को भी कोई आपत्ति होगी। आम बोलचाल और बातचीत में भी ‘पश्चिम बंगाल’ कहना थोड़ा अजीब सा लगता है, हम सभी की जुबान पर हमेशा सीधा ‘बंगाल’ ही आता है। तो आधिकारिक तौर पर भी यही नाम क्यों न हो? ‘पश्चिम बंगाल’ को केवल ‘बंगाल’ पुकारना कितना बढ़िया और स्वाभाविक लगेगा।
इसी साल हमने देखा है कि कैसे केरल का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से ‘केरलम्’ किया गया। हालांकि उसकी प्रक्रिया जून 2024 से शुरू हो गई थी और उसमें थोड़ा वक्त लगा। लेकिन बंगाल के मामले में इतना ज्यादा वक्त बिल्कुल नहीं लगना चाहिए। आखिर अब राज्य में भी बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बन रही है और केंद्र में तो बीजेपी है ही। यानी डबल इंजन की सरकार में फाइलों को दौड़ने में कोई अड़चन नहीं आनी चाहिए।
नई सरकार को मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं। उम्मीद है कि विकास, रोजगार और ‘पोरिबर्तोन’ के साथ-साथ राज्य की इस पहचान को भी वो जल्द दुरुस्त करेंगे और यह काम पहली फुर्सत में हो जाएगा। बाकी तो जो है, सो है ही।
– वीरेन्द्र सिंह राठौर















