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Ratlam News: ‘बालम ककड़ी’ को मिली वैश्विक पहचान: कॉपीराइट सर्टिफिकेट जारी, अब जीआई टैग की तैयारी; दिल्ली-मुंबई तक है भारी डिमांड

बालम ककड़ी को मिला कॉपीराइट सर्टिकफिकेट

बालम ककड़ी को मिला कॉपीराइट सर्टिकफिकेट

Ratlam News: रतलामी सेव और सोना के बाद अब रतलाम जिले की एक और पहचान देश भर में अपनी छाप छोड़ने को तैयार है। जिले के सैलाना क्षेत्र (Sailana Region) की मशहूर ‘बालम ककड़ी’ (Balam Kakdi) को भारत सरकार की ओर से कॉपीराइट सर्टिफिकेट (Copyright Certificate) मिल गया है। इसके साथ ही अब इसे जीआई टैग (GI Tag) दिलाने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले की कृषि संपदा में एक और नया अध्याय जुड़ गया है। जिले के सैलाना क्षेत्र में पाई जाने वाली विशेष ‘बालम ककड़ी’ को उद्यानिकी विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र (कालूखेड़ा) के विशेष प्रयासों से कॉपीराइट सर्टिफिकेट मिल गया है। यह सर्टिफिकेट इस फसल पर जिले के किसानों का विशेष अधिकार सुनिश्चित करेगा।

बालम ककड़ी को मिला कॉपीराइट सर्टिकफिकेट

क्यों खास है सैलाना की बालम ककड़ी?

वैसे तो बालम ककड़ी का उत्पादन धार, झाबुआ और बांसवाड़ा में भी होता है, लेकिन रतलाम के सैलाना की ककड़ी अपने स्वाद और तासीर के लिए मशहूर है।

सालाना 7500 क्विंटल का उत्पादन

जिले में बालम ककड़ी की खेती खरीफ सीजन के दौरान करीब 100 हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है। इससे सालाना लगभग 7500 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होता है। यह फसल अक्टूबर तक बाजार में उपलब्ध रहती है।

अब जीआई टैग (GI Tag) की तैयारी

उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक मंगलसिंह डोडवे ने बताया कि कॉपीराइट मिलने के बाद अब जीआई टैग (Geographical Indication) के लिए चेन्नई स्थित कार्यालय में आवेदन कर दिया गया है। जीआई टैग मिलने से सैलाना क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर विशेष पहचान मिलेगी।

रियावन लहसुन के बाद दूसरी बड़ी सफलता

गौरतलब है कि इससे पहले रतलाम जिले के रियावन की लहसुन (Riyavan Garlic) को जीआई टैग मिल चुका है, जिससे वह देश भर में प्रसिद्ध हो गई है। अब बालम ककड़ी को भी उसी तर्ज पर प्रमोट किया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में डॉ. रोहतास सिंह भदौरिया (कृषि विज्ञान केंद्र) और राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर के वैज्ञानिकों का अहम योगदान रहा है।

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