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Sagar News: बेटा नहीं था तो 7 बेटियों ने निभाया फर्ज, पिता की अर्थी को दिया कंधा और दी मुखाग्नि; नम हुईं सबकी आंखें

सागर: “बेटा-बेटी एक समान” का नारा अक्सर सुनने को मिलता है, लेकिन मध्य प्रदेश के सागर (Sagar) में सात बेटियों ने इसे चरितार्थ कर दिखाया। यहाँ एक पिता के निधन पर जब बेटा नहीं था, तो बेटियों ने ही बेटे का फर्ज निभाया। बेटियों ने न केवल पिता की अर्थी को कंधा दिया, बल्कि श्मशान घाट (Muktidham) पहुंचकर पूरे विधि-विधान के साथ मुखाग्नि भी दी। जिसने भी यह दृश्य देखा, उसकी आंखें नम हो गईं।

​नागपुर में इलाज के दौरान तोड़ा दम

​जानकारी के मुताबिक, सागर नगर निगम में अस्थाई सफाईकर्मी के पद पर कार्यरत डालचंद वाल्मीकि की तबीयत पिछले कुछ दिनों से खराब थी।

​रविवार को जब डालचंद का पार्थिव शरीर सागर लाया गया, तो परिवार में कोहराम मच गया।

​बेटियों ने तोड़ी रूढ़ियां, निभाया अंतिम फर्ज

​डालचंद वाल्मीकि का कोई बेटा नहीं है, उनकी सात बेटियां हैं। समाज की पुरानी रीतियों को पीछे छोड़ते हुए इन सातों बेटियों ने तय किया कि वे ही अपने पिता को अंतिम विदाई देंगी। अंतिम यात्रा में बेटियां शामिल हुईं और पिता की अर्थी को कंधा देकर श्मशान घाट तक ले गईं। वहां हिंदू रीति-रिवाजों के साथ उन्होंने पिता को मुखाग्नि दी।

​परिवार का रो-रोकर बुरा हाल

​डालचंद नगर निगम में अस्थाई कर्मी के तौर पर परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। उनकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल है, लेकिन दुख की इस घड़ी में उन्होंने जिस हिम्मत और जिम्मेदारी का परिचय दिया, उसकी पूरे शहर में चर्चा हो रही है। वहां मौजूद हर शख्स ने बेटियों के इस जज्बे को नमन किया।

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