मिडिल ईस्ट का तनाव अब एक पूर्ण और विनाशकारी युद्ध का रूप ले चुका है। अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। इजरायल ने अपने सैन्य अभियान को ‘ऑपरेशन लायंस रोर’ (Operation Lion’s Roar) नाम दिया है, जबकि अमेरिका इसे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) के तहत अंजाम दे रहा है।
हमले का मुख्य निशाना ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खमनेई का कार्यालय, राष्ट्रपति आवास और अहम सैन्य व परमाणु ठिकाने रहे। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक खमनेई को हमले से पहले ही एक सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया था।

हमले के ताज़ा आंकड़े और भारी तबाही
- स्कूल पर हमले में 51 से ज्यादा छात्राओं की मौत: शुरुआती आंकड़ों में 40 मौतों की बात कही गई थी, लेकिन ताज़ा और बेहद दुखद रिपोर्ट्स के अनुसार, दक्षिणी ईरान के मीनाब (होर्मोज़गान प्रांत) में एक गर्ल्स प्राइमरी स्कूल इजरायली हमले की चपेट में आ गया। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 51 से 57 छात्राओं की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 60 से अधिक घायल हैं।
- ईरान का पलटवार (125+ मिसाइलें): 400 मिसाइलों के शुरुआती दावों के बीच, ताज़ा सैन्य पुष्टि के अनुसार ईरान ने अपनी पहली जवाबी लहर में इजरायल की ओर लगभग 125 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। इसके अलावा उसने अपना दायरा बढ़ाते हुए अरब देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया है।
- खाड़ी देशों में अमेरिकी बेस पर सीधा हमला: ईरान ने सीधे तौर पर बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (Fifth Fleet HQ), कतर के अल उदेद एयर बेस (Al Udeid), यूएई (UAE) के अल धफरा और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं। यूएई की राजधानी अबू धाबी में मिसाइल के मलबे से एक व्यक्ति की मौत की खबर है।
परमाणु वार्ता खत्म, अमेरिका का ‘रेजीम चेंज’ का इशारा
यह भीषण सैन्य टकराव ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव चरम पर था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह “अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा और ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करने” के लिए किया गया है। ट्रंप ने सीधे ईरानी अवाम से अपील करते हुए अपनी सरकार (रेजीम) को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया है, जिससे स्पष्ट है कि अमेरिका सत्ता परिवर्तन चाहता है।
भारत और रूस की शांति की अपील
इस वैश्विक संकट के बीच दुनिया भर में हाई-अलर्ट है। एयरलाइंस ने मिडिल ईस्ट के ऊपर से उड़ानें रद्द कर दी हैं। जहां रूस ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है, वहीं भारत के विदेश मंत्रालय ने भी गहरी चिंता जताते हुए शांति, कूटनीति और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही है।
पाकिस्तान और अरब देशों के लिए कूटनीतिक ‘धर्मसंकट’
इस पूरी भू-राजनीतिक उथल-पुथल में पाकिस्तान बेहद विकट स्थिति में है। उसके सामने बड़ा धर्मसंकट है: एक तरफ पड़ोसी इस्लामिक देश ईरान है, तो दूसरी तरफ आईएमएफ (IMF) बेलआउट और आर्थिक मदद के लिए अमेरिका का दबाव। वहीं, अरब देशों (विशेषकर यूएई, कतर और बहरीन) की चिंताएं भी बढ़ गई हैं, क्योंकि उनकी ज़मीन का इस्तेमाल अमेरिका कर रहा है और वे सीधे ईरान के निशाने पर आ गए हैं। आने वाले दिनों में एशियाई और खाड़ी देशों के वैश्विक संबंधों के नए समीकरण बनना तय है।

