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Israel US Iran War ईरान पर अमेरिका और इजरायल की जॉइंट स्ट्राइक, 4 हजार मिसाइल दागी

इजरायल-ईरान युद्ध

Israel US Iran War मिडिल ईस्ट का तनाव अब एक पूर्ण और विनाशकारी युद्ध का रूप ले चुका है। अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। इजरायल ने अपने सैन्य अभियान को ‘ऑपरेशन लायंस रोर’ (Operation Lion’s Roar) नाम दिया है, जबकि अमेरिका इसे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) के तहत अंजाम दे रहा है।

हमले का मुख्य निशाना ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खमनेई का कार्यालय, राष्ट्रपति आवास और अहम सैन्य व परमाणु ठिकाने रहे। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक खमनेई को हमले से पहले ही एक सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया था।

हालांकि बाद में खबर आई कि इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खमनेई की मौत हो गई है । जिसके बाद तनाव और बढ़ गया है ।

ईरान भी अब जवाबी कार्रवाई कर रहा है । इस पूरे युद्द से आने वाले दिनों में जियो पॉलिटिकल पर बड़ा असर पड़ सकता है ।

Israel US Iran War ईरान पर अमेरिका और इजरायल की जॉइंट स्ट्राइक

Israel US Iran War हमले के ताज़ा आंकड़े और भारी तबाही

परमाणु वार्ता खत्म, अमेरिका का ‘रेजीम चेंज’ का इशारा

यह भीषण सैन्य टकराव ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव चरम पर था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह “अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा और ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करने” के लिए किया गया है। ट्रंप ने सीधे ईरानी अवाम से अपील करते हुए अपनी सरकार (रेजीम) को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया है, जिससे स्पष्ट है कि अमेरिका सत्ता परिवर्तन चाहता है।

भारत और रूस की शांति की अपील

इस वैश्विक संकट के बीच दुनिया भर में हाई-अलर्ट है। एयरलाइंस ने मिडिल ईस्ट के ऊपर से उड़ानें रद्द कर दी हैं। जहां रूस ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है, वहीं भारत के विदेश मंत्रालय ने भी गहरी चिंता जताते हुए शांति, कूटनीति और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही है।

पाकिस्तान और अरब देशों के लिए कूटनीतिक ‘धर्मसंकट’

इस पूरी भू-राजनीतिक उथल-पुथल में पाकिस्तान बेहद विकट स्थिति में है। उसके सामने बड़ा धर्मसंकट है: एक तरफ पड़ोसी इस्लामिक देश ईरान है, तो दूसरी तरफ आईएमएफ (IMF) बेलआउट और आर्थिक मदद के लिए अमेरिका का दबाव। वहीं, अरब देशों (विशेषकर यूएई, कतर और बहरीन) की चिंताएं भी बढ़ गई हैं, क्योंकि उनकी ज़मीन का इस्तेमाल अमेरिका कर रहा है और वे सीधे ईरान के निशाने पर आ गए हैं। आने वाले दिनों में एशियाई और खाड़ी देशों के वैश्विक संबंधों के नए समीकरण बनना तय है।

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